स्वजातीय महत्वपूर्ण बन्धु

स्व. श्री गणेश प्रसाद साहा

मद्धेशिया समाज के अनमोल रत्न: स्व. श्री गणेश प्रसाद साहा प्रेमी हृदय

स्वजातीय गौरव और सशक्त संगठन के समर्पित स्तंभ: एक अमिट हस्ताक्षर

स्वजातीय उत्थान और संगठन के प्रति समर्पण भाव रखने वाली विभूतियों की श्रृंखला में मद्धेशिया समाज के पास अनमोल रत्न हैं। इन सभी को शब्दों में समेटना सरल नहीं है, किंतु मध्यदेशीय वैश्य महासभा की वेबसाइट और आगामी पत्रिका के माध्यम से हम अपने समाज के गौरव को एक अमिट हस्ताक्षर के रूप में सहेजने का प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में एक देदीप्यमान नाम है— स्वर्गीय श्री गणेश प्रसाद साहा जी।

मूल जड़ें और परिचय

मध्य प्रदेश के रीवा शहर के निवासी रहे गणेश बाबू को समाज आज भी प्रेमी हृदय के उपनाम से स्मरण करता है। यद्यपि उनकी कर्मभूमि मध्य प्रदेश रही, किंतु उनका मूल स्थान बिहार के तत्कालीन सारण जिले के विश्वविख्यात हरिहर क्षेत्र का ग्राम सोनपुर था। आज भी मद्धेशिया समाज में उनका नाम न केवल सम्मान, बल्कि गहरी आत्मीयता और गर्व के साथ लिया जाता है।

संगठन के शिल्पकार और संस्थापक

श्री गणेश प्रसाद साहा जी दूरदर्शी संगठनकर्ता थे। वर्ष 1981 में मध्य प्रदेश में प्रथम स्वजातीय संगठन की नींव रखने में आपकी मुख्य भूमिका रही। आपने श्री देवीदास आर्य जी को प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत करते हुए राज्य में मद्धेशिया समाज के संगठन का बीजारोपण किया।
राष्ट्रीय स्तर पर भी आपका योगदान अविस्मरणीय है। सन् 1976 में पहली बार पंजीकृत हुई हमारी मातृ संस्था अखिल भारतीय मध्यदेशीय वैश्य महासभा (ABMVMS) के आप संस्थापक सदस्य (Founder Member) रहे। संगठन के प्रति अटूट निष्ठा के कारण ही आपने वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे गरिमामयी पदों को सुशोभित किया।

पत्रकारिता के पुरोधा: वैश्य वाणी से वैश्य मित्र तक

समाज को वैचारिक रूप से जोड़ने के लिए गणेश बाबू ने पत्रकारिता को अपना सशक्त माध्यम बनाया:

वैश्य वाणी: समाज की प्रथम मासिक पत्रिका वैश्य वाणी का प्रकाशन 1949 में इलाहाबाद (बादशाही मंडी) के आरती प्रेस से आरंभ हुआ था। इसके प्रथम संपादक के रूप में गणेश बाबू ने कमान संभाली और वर्ष 1966 तक (अंतिम प्रकाशन तक) लगातार 17 वर्षों तक इसका संपादन किया।

वैश्य मित्र: पत्रकारीय लौ को जलाए रखने के लिए उन्होंने अपने निजी प्रेस शक्ति प्रेस (रीवा) से वैश्य मित्र नामक दूसरी पत्रिका का संपादन शुरू किया, जिसके संपादक उनके अनुज स्व. श्री आदित्य प्रकाश गुप्ता जी थे।

पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए वर्ष 2000 में उन्हें प्रतिष्ठित नींव का पत्थर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

विरासत जो आज भी जीवंत है

यह हमारे समाज के लिए हर्ष का विषय है कि उनकी सेवा और समर्पण की विरासत आज भी जारी है। उनके ज्येष्ठ सुपुत्र, एडवोकेट प्रफुल्ल कुमार गुप्ता जी, वर्तमान में हमारे एकमात्र राष्ट्रीय पंजीकृत संगठन मध्यदेशीय वैश्य महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में समाज की सेवा कर रहे हैं।



विनम्र श्रद्धांजलि

ऐसे मूर्धन्य पत्रकार, संगठनकर्ता और समाज के सच्चे सेवक स्व. श्री गणेश प्रसाद साहा जी को पूरा मद्धेशिया समाज अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उनका जीवन और उनके विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बने रहेंगे।

राष्ट्रीय संरक्षक