अपने सांसद
मध्यदेशीय वैश्य महासभा
श्री सुदामा प्रसाद
सुदामा प्रसाद बिहार के एक जाने-माने और जमीन से जुड़े हुए राजनेता हैं, जो पहले बिहार विधानसभा में विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में संसद सदस्य (लोकसभा सांसद) के रूप में देश की राजनीति में सक्रिय हैं। उनके जीवन और राजनीतिक सफर का विवरण निम्नलिखित है:
राजनीतिक परिचय एवं जनप्रतिनिधि के रूप में सफर
वर्तमान पद: वह वर्तमान में आरा (Arrah) लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 18वीं लोकसभा के सांसद (MP) हैं। उन्होंने 2024 के आम चुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन [CPI(ML) Liberation] के टिकट पर शानदार जीत दर्ज की थी।
दिग्गज को दी थी शिकस्त: 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आरा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आर के सिंह को लगभग 60,000 मतों के अंतर से पराजित किया था।
बिहार विधानसभा में कार्यकाल (विधायक के रूप में):
संसद पहुंचने से पहले वह बिहार विधानसभा में दो बार विधायक रह चुके हैं।
उन्होंने वर्ष 2015 और फिर 2020 के विधानसभा चुनाव में भोजपुर जिले की तरारी (Tarari) विधानसभा सीट से सीपीआई (एमएल) के विधायक के रूप में जीत हासिल की थी।
सांसद बनने के बाद उन्होंने जून 2024 में बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
जन्म: सुदामा प्रसाद का जन्म 2 फरवरी 1961 को बिहार के भोजपुर जिले के पावना गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता गांव में एक छोटी सी दुकान चलाते थे।
शिक्षा: उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा हर प्रसाद दास जैन स्कूल, आरा से पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए जैन कॉलेज, आरा में दाखिला लिया। हालांकि, बाद में जन आंदोलनों और राजनीतिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ने के कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: वह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अंतर्गत आने वाले कानू (हलवाई) समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। सामाजिक सुधार और अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा देते हुए उन्होंने वर्ष 1993 में शोभा मंडल से विवाह किया।
सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष
सुदामा प्रसाद का राजनीतिक सफर मुख्य रूप से छात्र आंदोलनों, सांस्कृतिक मोर्चों और गरीबों, भूमिहीनों व किसानों के अधिकारों की लड़ाई से शुरू हुआ था।
वह लंबे समय तक सीपीआई (एमएल) के पूर्णकालिक कार्यकर्ता और राज्य समिति के सदस्य रहे हैं।
बिहार विधानसभा में अपने कार्यकाल के दौरान वह पुस्तकालय समिति (Library Committee) के सभापति भी रहे, जहां उन्होंने राज्य भर के बंद पड़े सार्वजनिक पुस्तकालयों को पुनर्जीवित करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया था।
अपनी सादगी, संघर्षशील और जमीनी छवि के लिए जाने जाने वाले सुदामा प्रसाद वर्तमान में बिहार से लेफ्ट (वामपंथी) राजनीति के एक मजबूत चेहरे के रूप में जाने जाते हैं।
