हमारे विधायक
मध्यदेशीय वैश्य महासभा
शà¥à¤°à¥€ पबà¥à¤¬à¤° राम गà¥à¤ªà¥à¤¤
à¤à¤• पतà¥à¤° शà¥à¤°à¥€ अजय कà¥à¤®à¤¾à¤° मिशà¥à¤° जी के माधà¥à¤¯à¤® से कà¥à¤› दिनों पूरà¥à¤µ हासिल हà¥à¤† | पतà¥à¤° का पबà¥à¤¬à¤° राम पर केनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¤ गाजीपà¥à¤° से पà¥à¤°à¤•ाशित होने जा रही सà¥à¤®à¤¾à¤°à¤¿à¤•ा के लिठकà¥à¤› संसà¥à¤®à¤°à¤£ लिखने से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ था | सà¥à¤®à¤¾à¤°à¤¿à¤•ा का लोकारà¥à¤ªà¤£ का० पबà¥à¤¬à¤° राम की पà¥à¤°à¤¥à¤® पà¥à¤£à¥à¤¯ तिथि 24 मारà¥à¤š 2007 को होना तय है | à¤à¤• लमà¥à¤¬à¥€ ज़िनà¥à¤¦à¤—ी को जन संघरà¥à¤·à¥‹ के हवाले कर देने वाले पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ की सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ छबियां कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ पारà¥à¤Ÿà¥€ का à¤à¤• सचेत संघरà¥à¤·à¤¶à¥€à¤² साथी , गाजीपà¥à¤° नगरपालिका का à¤à¤• जन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿ जो जीवन के अंतिम पड़ाव पर लाल परचम को अपने कंधे पर उठगये चलता रहा | रà¥à¤•े ना जो à¤à¥à¤•े न जो , दबे न जो हम वो इनà¥à¤•लाब हैं ... के तराने को गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤¾ नारे लगाता | हम समानधरà¥à¤®à¤¾ साथियों के लिठउरà¥à¤œà¤¾ और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤• पà¥à¤°à¥à¤· का० पबà¥à¤¬à¤° राम को लाल सलाम |
सात फरवरी 1911 ई. को गाजीपà¥à¤° शहर के पूरà¥à¤µà¥€ छोर का बवाड़े गाà¤à¤µ में माठजलेबी देवी और पिता ऋतà¥à¤°à¤¾à¤œ की कोख में जनà¥à¤®à¥‡ पबà¥à¤¬à¤° राम à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में चल कर गाजीपà¥à¤° का à¤à¤• इतिहास रचेगा यह कौन जनता था | वैशà¥à¤¯ परिवार की कमजोर पृष� à¤à¥‚मि के साथ माता पिता के वैचारिक धरातल से à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾ | पिता धारà¥à¤®à¤¿à¤•ता से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ मन के आदमी और माता कà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¿à¤•ारिता की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र | हिनà¥à¤¦à¥‚ परिवारों में इस तरह की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ महिलाओं के à¤à¥€à¤¤à¤° कम ही पाई जाति रही वह à¤à¥€ उस दौर में | माठजलेबी देवी के विचार का पूरा पूरा असर पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ के दिलोदिमाग पर पड़ा | सà¥à¤°à¥à¤– सूरज का उजाला और उसकी तलाश में चल पड़े पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ | मिडिल तक शिकà¥à¤·à¤¾ गà¥à¤°à¤¹à¤£ करने के बाद पढाई को सà¥à¤¥à¤—ित कर पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ हिंदà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨ के जंगे आज़ादी के हिरावल दसà¥à¤¤à¥‡ में शामिल हो गठ| महातà¥à¤®à¤¾ गाà¤à¤§à¥€ का सà¥à¤µà¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ हमारा जनà¥à¤® सिदà¥à¤§ अधिकार है का नारा हवाओं में तैर रहा था | सविनय अवजà¥à¤žà¤¾ आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ और कà¥à¤°à¤¾à¤‚तिकारियों का आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ देश को आजाद करने की मà¥à¤¹à¥€à¤® में लग चà¥à¤•ा था | जो अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 1929 में गाजीपà¥à¤° के लंका के मैदान में गाà¤à¤§à¥€ जी की सà¤à¤¾ होनी थी | पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ की ज़िमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ गाà¤à¤§à¥€ जी की सेवा में कà¥à¤› कमी न होने देने जैसी थी | लंका मैदान की सà¤à¤¾ के इनà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¾à¤® में à¤à¥€ वे लगे | यह सब कà¥à¤› उनके संकलà¥à¤ª व संघरà¥à¤· की उरà¥à¤œà¤¾ को देखते हà¥à¤ बड़े नेताओं ने किया | कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ लगाओ à¤à¤µà¤‚ à¤à¥à¤•ाव के बावजूद उनकी सोच गरम दल के साथियों के साथ कम कर रही थी | पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ की कà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤à¤¿à¤•ारी सोच ही उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आगे चलकर लाल à¤à¤‚डे से जोड़ दिया | जैसे जैसे सà¥à¤µà¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ जोर पकड़ता गया वैसे वैसे पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ की à¤à¥‚मिका महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होती गई अब पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ ने किसान व मजदूरों के मोरà¥à¤šà¥‡ पर à¤à¥€ अपनी लड़ाई तेज़ कर दी | आज़ादी की लड़ाई में धन की कमी न होने पाठइसके लिठकà¥à¤°à¤¾à¤‚तिकारियों के साथ मिलकर पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ ने आंकà¥à¤¶à¤ªà¥à¤° टà¥à¤°à¥‡à¤¨ डकैती की योजना बनाई और उकà¥à¤¤ कारà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¹à¥€ के सूतà¥à¤°à¤§à¤¾à¤° बन गये | अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ हà¥à¤•à¥à¤®à¤¤ में गाà¤à¤µ के सामनà¥à¤¤à¥‹ - ज़मींदारो का उतà¥à¤ªà¥€à¤¡à¤¨ किसानो मजदूरों के ऊपर आतंक का साया बन खड़ा था | पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ ने ज़मींदारो के उतà¥à¤ªà¥€à¤¡à¤¨ के खिलाफ किसानो मजदूरों को संग� ीत कर लड़ाई तेज़ कर दी | सामंतो के लठतो की पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ को खानी पड़ी | परनà¥à¤¤à¥ बà¥à¤°à¥€ तरह से चोट खाने के बावजूद उठखड़े हà¥à¤ , उनके साहस को देख किसानो का मनोबल और बढ गया , उनकी लड़ाई और तेज़ हो गयी | गाजीपà¥à¤° अफीम फैकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ के शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ो के शोषण के विरà¥à¤¦à¥à¤§ à¤à¥€ पबà¥à¤¬à¤° राम ने लमà¥à¤¬à¥€ लड़ाई छेड़ दी | किसानो की जà¥à¤¬à¤¾à¤¨ पर पबà¥à¤¬à¤° राम का नाम किसान जी के रूप में पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤²à¤¿à¤¤ था |
आज़ादी के बाद 1953 में गाजीपà¥à¤° नगर पालिका का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ तय था | कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ पारà¥à¤Ÿà¥€ ने पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ को अपना पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¥€ घोषित किया और उनके मà¥à¤•ाबले कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ पारà¥à¤Ÿà¥€ ने गाजीपà¥à¤° के नाम गिरामी रईस जमींदार परिवार से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤Ÿà¤¿à¤¤ à¤à¤¡à¥‹à¤•ेट बशीर हसन आबà¥à¤¦à¥€ को खड़ा किया | बशीर हसन कोई और नहीं गंगौली के राही मासूम रजा व मà¥à¤¨à¥€à¤¶ रजा के पिता थे | अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹ के जाने के बाद à¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में सामंतो और ज़मींदारो का रंग रà¥à¤¤à¤¬à¤¾ रियाया वरà¥à¤— में बरकरार था |
कहाठà¤à¤• छोटे से गाà¤à¤µ का à¤à¤• आम आदमी राम और कहाठदौलत सोहरत और दबंगई से à¤à¤°à¤ªà¥‚र जमींदार परिवार का पढ़ा लिखा नौजवान , वह à¤à¥€ वकालत की पढाई और जिला कचहरी की शानदार पà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ करने वाले बशीर हसन आबà¥à¤¦à¥€ à¤à¤¡à¥‹à¤µà¥‹à¤•ेट |
का० पबà¥à¤¬à¤° राम और बशीर हसन आबà¥à¤¦à¥€ को चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥€ जंग में दो किरदार और सामने आये आगे चलकर हिंदà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨ की परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ के मज़बूत सà¥à¤¤à¤®à¥à¤ बन गठ| मेरा आशय मà¥à¤¨à¥€à¤¶ रज़ा और राही मासूम रज़ा से है जो पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ के चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥€ जंग के संवाहक बने | सबसे बड़ी बात यह थी की मà¥à¤¨à¥€à¤¶ रज़ा और रही मासूम रज़ा कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¥€ बशीर हसन आबà¥à¤¦à¥€ के सगे बेटे थे जो उन दिनों गाजीपà¥à¤° में अपने पिता के साथ रहते हà¥à¤ पढाई कर रहे थे | चà¥à¤¨à¤¾à¤µ के दौरान मà¥à¤¨à¥€à¤¶ रज़ा और मासूम रजा कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ पारà¥à¤Ÿà¥€ के पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¥€ पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ को चà¥à¤¨à¤¾à¤µ जिताने के लिठदिन रात à¤à¤• किये हà¥à¤ थे | गली गली नà¥à¤•à¥à¤•ड़ सà¤à¤¾à¤ , कà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤à¤¿à¤•ारी गीत और à¤à¤¾à¤·à¤£ करते हà¥à¤ मà¥à¤¨à¥€à¤¶ रज़ा और राही मासूम रज़ा अपने ही पिता के खिलाफ और पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ के पकà¥à¤· में | मà¥à¤¨à¥€à¤¶ रज़ा तो चà¥à¤¨à¤¾à¤µ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° के बाद अपने पिता के घर चले जाते थे और फिर दà¥à¤¸à¤°à¥‡ दिन पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° में लग जाते थे | परनà¥à¤¤à¥ राही मासूम रज़ा तो दिन रात पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ के साथ ही रहते और जहाठजो कà¥à¤› मिला खा लेते | राही अपने घर तब वापस लौटे जब काम० पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ को शानदार विजय हाशिल हो गई यानि उनके पिता बशीर हसन साहब काम० पबà¥à¤¬à¤° राम से चà¥à¤¨à¤¾à¤µ हार गठ| चà¥à¤¨à¤¾à¤µ बाद अपनी पढाई पूरी करने अलीगढ चले गठपरनà¥à¤¤à¥ सà¥à¤°à¥à¤– रंग में रंगे दोनों à¤à¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ ने मृतà¥à¤¯à¥ परà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ लाल रंग को अपने सीने से लगाये ही नहीं रखा बलà¥à¤•ि हिनà¥à¤¦à¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨ की परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ के बेमिशाल नाम के रूप में इतिहास के पनà¥à¤¨à¥‹ के हकदार बन गठ| मà¥à¤¨à¥€à¤¶ रज़ा व राही मासूम रज़ा की जीवन चादर को पकà¥à¤•े लाल से रंगने वाला रंगरेज़ कोई और नहीं का० पबà¥à¤¬à¤° राम ही तो थे |
काम० पबà¥à¤¬à¤° राम 1957 और 1967 में दो बार गाजीपà¥à¤° से विधान सà¤à¤¾ का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ जीतकर कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ पारà¥à¤Ÿà¥€ का गाजीपà¥à¤° में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ किया | इतना ही नही पà¥à¤°à¥‡ पूरà¥à¤µà¥€ उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में लाल परचम की कामयाबी का जो à¤à¤• दौर था उसके पीछे पबà¥à¤¬à¤° राम की à¤à¤• निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• à¤à¥‚मिका तो थी ही |
1980 के बाद से वैचारिक साहितिक सांसà¥à¤•ृतिक गतिविधियों में मेरी सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ बढने लगी | ऋषिकेश जी व डाकà¥à¤Ÿà¤° पी० à¤à¤¨à¥¦ सिह का मऊ आना जाना बढने लगा और मेरी à¤à¥€ यातà¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‡à¤‚ गाजीपà¥à¤° के लिठखूब होने लगी | गाजीपà¥à¤° की कोई à¤à¥€ गोषà¥à¤Ÿà¥€ न छà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡ पाठमेरी कोशिश रही और गोषà¥à¤Ÿà¥€ में पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ और रामनाथ जी से मà¥à¤²à¤¾à¤•त तो होती रहती थी | बड़े बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के जीवन अनà¥à¤à¤µ जानना और उनसे कà¥à¤› सीखना सà¥à¤–द लगता था | अजीब आतà¥à¤®à¥€à¤¯ लगाओ , सà¥à¤¨à¥‡à¤¹à¤¿à¤¤ आà¤à¤–े और वà¥à¤¯à¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤• खà¥à¤°à¤¾à¤• | मऊ के à¤à¤• à¤à¤• साथियों का हाल चाल , गतिविधियों के बारे में जानने की उतà¥à¤¸à¥à¤•ता पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ की आà¤à¤–ों व जà¥à¤¬à¤¾à¤¨ से टपकती रहती थी | जब अà¤à¤¿à¤¨à¤µ कदम का राही मासूम रज़ा विशेषांक छप कर आया तो पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ ने मà¥à¤à¤¸à¥‡ 20 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ माà¤à¤—ा ली और शहर में ही नहीं गाà¤à¤µ के लोगो ने उसे बेचà¤à¤° à¤à¤• महीने बाद उसकी सहयोग राशि à¤à¥€ शà¥à¤°à¥€ अजय कà¥à¤®à¤¾à¤° मिशà¥à¤° के माधà¥à¤¯à¤® से मऊ à¤à¤¿à¤œà¤µà¤¾à¤¯à¤¾ |
काम० पबà¥à¤¬à¤° à¤à¤¾à¤ˆ को याद करना à¤à¤• लमà¥à¤¬à¥‡ जीवन संघरà¥à¤·à¥‹à¤‚ को याद करना है जो जीवन परà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ आम आदमी के सवालों को लेकर सतà¥à¤¤à¤¾ , समाज , पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ से मà¥à¤ à¤à¥‡à¥œ करता रहा | कà¤à¥€ हार न मानने के साथ लाल à¤à¤¨à¥à¤¡à¥‡ को तहरीक को जीवन की आखरी साà¤à¤¸ तक चलता रहा | à¤à¤¸à¥‡ सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ संगà¥à¤°à¤¾à¤® सेनानी को नमन के साथ साथ लाल à¤à¤‚डे के योदà¥à¤§à¤¾ को बार बार सलाम |
